17 Febuary Class 10th Hindi Guess Viral Question Paper 2026 – बिहार बोर्ड 17 फरवरी हिंदी वायरल पेपर 2026
प्यारे साथियो आपलोग के लिए काफी वायरल Guess प्रश्न लेकर आ चुके है तो आपलोग निचे दिए गए प्रश्न उत्तर को जरूर पढ़कर परीक्षा देने जाए । क्युकी यह सब प्रश्न परीक्षा मे बार बार पूछे जाने वाले है तो आपलोग इस प्रश्न को याद जरूर कर ले
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17 फरवरी Hindi Viral Out Question 2026

1. “बिस्मिल्ला खाँ का मतलब बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई।” इसका अर्थ स्पष्ट करें। (2020 (A)
ANS– : बिस्मिल्ला खाँ शहनाई के प्रति इस तरह समर्पित है कि ये दोनों एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं। बिस्मिल्ला खाँ का नाम सुनते ही मानसपटल पर शहनाई की आकृति उभर आती है और चित्त में उसकी आकर्षक मधुर आवाज गूंजने लगती है। ‘शहनाई’ शब्द कानों में पड़ता है तो बिस्मिल्ला खाँ का संगीतमय व्यक्तित्व सामने खड़ा हो जाता है। शहनाई और बिस्मिल्ला खाँ का तादात्म्य अपूर्व है। लगातार अस्सी बरस कठोर साधना की, तब ने हासिल कर सके वह मंजिल, जहाँ पहुँचने के लिए हर कलाकार सपने देखता है। शहनाई वादन में उन्हें वह प्रसिद्धि मिली जिसके लिए कोई कलाकार सपने सैंजोता है। इसलिए, जब ‘बिस्मिल्ला खाँ’ शब्द कानों में गूँजता है तब निस्मिल्ला खाँ का व्यक्तित्व, शहनाई की आकृति और इसके मधुर संगीत में व्यक्ति खो जाता है और केवल शहनाई ही दिखाई पड़ती है।
2. लेखक ने ‘नया सिकंदर’ किसे कहा है? ऐसा कहना क्या अंधा लेखक का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए। [2019 (A) 2023
उत्तर : लेखक ने भारतीय सिविल सेवा देतु चयनित युवा अँगरेज अधिकारियों को ‘नया सिकंदर’ कहा है। लेखक कां ऐसा कहना उचित है, क्योंकि उनकी नौकरी यहाँ भारत में पक्की थी। सिकंदर राजनीतिक जीत के लिए भारत आया था। वह विश्वविजेता बनना चाहता था और उसी क्रम में वह भारत आया था। नए अँगरेज अधिकारी ‘सिकंदर’ नहीं, ‘नए सिकंदर’ के रूप में लेखक द्वारा संबोधित किए गए हैं। अर्थात, लेखक राजनीतिक विजय के स्थान पर सांस्कृतिक विजय को महत्त्व दे रहा है। लेखक कहता है कि जिस तरह सर विलियम जोन्स ने भारत आकर प्राच्य देशों के इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में अनेक महत्त्वपूर्ण विजय प्राप्त की है, उसी तरह भारतीय सिविल सेवा हेतु चयनित युवा अँगरेज अधिकारियों को भी भारतीय इतिहास और साहित्य के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण सफलताएँ अर्जित करनी चाहिए, क्योंकि भारतीय इतिहास और साहित्य अपरिमित और अनंत है। इन क्षेत्रों में शोध और अनुसंधान के अनगिनत अवसर हैं।
3. ‘नौवतखाने में इवादत’ पाठ के आधार पर विस्मिल्ला खाँ के वयपन का वर्णन करे
उत्तर : अमीरुद्दीन (बिस्मिल्ला खाँ के बचपन का नाम) का जन्म डुमराँव, बिहार के एक संगीतप्रेमी परिवार में हुआ था। 5-6 वर्ष डुमराँव में बिताकर वे नाना के घर काशी में आ गए। यहीं उनका सारा जीवन व्यतीत हुआ। वे जब चार साल के थे तब छिपकर नाना को शहनाई बजाते हुए सुना करते थे। रियाज के बाद जब उनके नाना अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त हो जाते थे तब बिस्मिल्ला खाँ (अमीरुद्दीन) ढेरों छोटी-बड़ी शहनाइयों की भीड़ से अपने नानावती शहनाई ढूँढ़ते और एक-एक शहनाई को फेंककर खारिज करते जाते। वे अपने मन में यही सोचते कि मीठीवाली शहनाई नाना कहीं और रखते हैं।
बिस्मिल्ला खाँ को बचपन में फिल्म देखने का बहुत शौक था। बचपन में वे फिल्मों के दीवाने थे। गीताबाली और सुलोचना की तो वे कोई फिल्म नहीं छोड़ते थे। वे उनकी पसंदीदा हीरोइनें थी। उस समय थर्ड क्लास (तुतीय श्रेणी) के लिए छह पैसे कर टिक्ट मिलता था। वे दो पैसे मामू से, दो पैसे मौसी से और दो पैसे नानी से लेते थे और घंटों लाइन में लग टिकट हासिल करते थे। अमीरुद्दीन छह-सात बरस की उम्र से ही शहनाई बजाने में माहिर हो गए थे।
4. परंपरा का ज्ञान किनके लिए सबसे अधिक आवश्यक है, और क्यों ? [2019(A)(FS.J]
उत्तर: जो लोग रूढ़ियों के अनुचर नहीं हैं, उन्हें तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य की रचना करना चाहते है तथा साहित्य में युग-परिवर्तन की आकांक्षा रखते हैं, उनके लिए साहित्य की परंपरा कर ज्ञान सबसे ज्यादा आवश्यक है।
5. विरजू महाराज के गुरु कौन थे? सक्षिप्त परिचय दे (2019)
उत्तर:– बिरजू महाराज के गुरु उनके बाबुजी थे। वे अच्छे स्वभाव के थे। वे अपने दुःख को व्यक्त नहीं करते थे। उन्हें कला से बेहद प्रेन था। जब बिरजू महाराज साढ़े नौ साल के थे, उसी समय उनकी मृत्यु हो गई। मलराज को तालीम बाबुजी ने ही दिया।
6. लेखक ने नीतिकथाओं के क्षेत्र में किस तरह भारती अवदान को रेखांकित किया है? स्पष्ट करे। [2018]
Ans– लेखक (मैक्समूलर) के अनुसार भारत के कारण ही समय-समय पर नानाविध साधनों और मागों के द्वारा अनेक नीति कपाएँ पूर्व से पश्चिम की ओर आती रही हैं। संस्कृत की कई नीति कथाएँ पश्चिम में प्रचलित है। भारतीय नीति कथाएँ यूनान में ईसापूर्व चौथी सदी में ही स्टूट्टिस की कहानियों में स्थान पा गई थीं। भारत में प्रचलित नेवले (न्योले) या चूहे से संबंधित नीति कथा का प्रभाव पश्चिम (यूरोप) के रीति कथाकार एफ्रोडाइट में देखा जा सकता है। यूरोप के देशों में भारतीय नीति कथाएँ घोड़े-बहुत परिवर्तन के साथ ईसा के कई सौ वर्ष पूर्व ही प्रचलित हो गई थीं। (जातक कथाओं, गुणाढ्य की ‘बृहत्वथा’, ‘पंचतंत्र’ (पाँचवी छठी शती एवं हितोपदेश’ कर विश्वव्यापी प्रचार हुआ और उन्होंने विश्व कहानी साहित्य का भंडार भरा
7. मदन और ड्राइवा के बीच के विवाद के द्वारा कहानीकार क्या बताना चाहना है? [2014
उत्तर: पाँच-छह वर्ष का बालक मदन जिज्ञासावश सेन साहब की गाड़ी छूता है। ड्राइवर मदन को मना करता है। मदन चोच नहीं पाता कि छूनेभर से गाड़ी में कोई खराबी आ जाएगी। यह मना करने के बाद भी गाड़ी को छूता है। शोफर (ड्राइवर) को हर है कि मदन के छूने से गाड़ी गंदी हो जाएगी जिसके चलते उसे सेन साहब से डॉट सुननी पड़ेगी। मदन का बाल मन ड्राइवर के इस तर्क को नहीं मानता। वह ड्राइवर के मना करने के बाद भी गाड़ी को छूने की कोशिश करता है। ड्राइवर उसे धकेल देता है तो वह ड्राइवर से ही उलझ जाता है। मदन और ड्राइवर के बीच के इस क्रियात्मक विवाद से कहानीकार यह बताना चाहता है कि आर्थिक रूप से विपत्र व्यक्ति धनी वर्ग का ही पक्ष लेता है, पर जिसे अपनी विपन्नता का ही अहसास नहीं है, उसे वर्गभेद से कुछ लेना-देना नहीं होता। वर्गभेद की संकीर्णता से ऊपर उठकर वह अपनी ठसक और मौज में जीता है। ड्राइवर शोषित वर्ग का स्वाभाविक प्रतिनिधित्व करता है और मदन शोषक वर्ग के प्रति शोषित वर्ग का विरोध दर्ज करता है। ड्राइवर और मदन दोनों शोषित वर्ग से ही आते हैं, पर दोनों में एक फर्क है। बड़ा होने के बावजूद ड्राइवर में ‘बोध’ नहीं है। यह शोषक वर्ग का पिछलग्गू है। बालक होने पर भी मदन में ‘बोध’ है। वह शोषक वर्ग के विरोध में अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करता है और अपने ही वर्ग के ड्राइवर से झगड़कर यह अहसास पैदा करना चाहता है कि सारे झोपड़ीवाले एक हो आएँ, तो महलों की तरफ से चलनेवाली शोषण की हवा उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती
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